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मेडिकल उपस्करों के दामो पर अंकुश

अभी अद्यतन स्थिति यह है की दिल्ली हाई कोर्ट में एक पी आई एल फाइल होने जा रही है क्योकि नेशनल फर्मेसिटीकल प्राइसिंग अथोरिटी को हॉस्पिटल्स के विरुद्ध नियम के उल्लंघन और पुराणी पढ़ती पैर दाम वसूलने की अनेक शिकायते मिल रही है जिनमे देश बहर के कई बड़े विख्यात हॉस्पिटल है . नियम के अनुसार स्टंट का ब्रांड तथा अलग से कीमत बताना और बिल में विशेष उल्लेख का प्रावधान रखा गया है और इस नियम का भी पालन नहीं हो रहा...

दायित्व किसका ....

दायित्व किसका .......

उपभोक्ता अदालते और वाणिज्यिक प्रयोजन –फिर एक और विवाद

यदि टाइपराइटर स्व रोजगार हेतु अपने प्रयोग के लिए खरीदा है या कार स्व रोजगार हेतु खुद चलने के लिए खरीदी है तो वाणिज्यिक प्रयोजन नहीं होगा . · यदि किसी कंपनी ने टाइपराइटर कराम्चारियो के लिए खरीदी हो या टैक्सी कंपनी ने ड्राईवर के साथ किराये पर देने के लिए खरीदी है तो यह वाणिज्यिक प्रयोजन होगा...

पेकर तथा मूवर की सेवा मे आपके समान की सुरक्षा का प्रश्न

उपभोक्ता को भी सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है – · अपने समान की पूरी सूची दे । · जहा तक संभव हो ,समान की लगभग कीमत का प्रमाण रखे ,वह खरीद की रसीद आदि हो सकती है । · पेकर के नियमो शर्तो को अवश्ये जान ले । · बीमा करना आपके हित मे होता है ,पता रखे की पेकर का ट्रक बीमित है या नहीं । · नाज़ुक समान के बारे मे बताए ताकि उसकी संभाल उसी तरह की जा सके । · कोई कीमती गहने या पैसे आदी समान के साथ न रखे । · कोई विस्फोटक या नुकसान देने वाली वस्तु ट्रक मे ने लादे ।...

उपभोक्ता अदालतों की कर्येपद्धति पर उपभोक्ताओ के अकाट्य प्रश्न

बेहस सुनने वाले मेम्बर को छोड़ बेहस के समये अनुपस्थित रहे दुसरे मेम्बर द्वारा आर्डर पर हस्ताक्षेर ऐसा हो ही रहा है जो की कानून की दृष्टी से आर्डर को इललीगल बना देता है और उस ऑर्डर को इसी बात पैर चुनौती दी जा सकती है . यहाँ यह समझना आवश्यक है की आर्डर पैर हस्ताक्षेर किसी भी दिन हो ,बेहेस के दिन जिसने बेहेस सुनी वाही हस्ताक्षेर केर सकता है . उपभोक्ता इन गलतियों का शिकार हो रहा है जिसकी उसे खुद भी समझ नहीं होती . यह दायित्व अदालतों का है की इन बातोका ध्यान रखा जाये. यह सब बाते आलोचना के लिए नहीं है .छोटी छोटी भूल से बड़ी बड़ी कठिनाईयों से घिरे उपभोक्ता को रहत देने के लिए एक आवेदन है . सरकार इस दृष्टी में कारगर कदम उठाये ,यह सद इच्छा है....

नए उपभोक्ता कानून में विज्ञापन में सेलिब्रिटी का दायित्व

प्रश्न फ़िल्मी सितारों द्वारा अपनी फिल्मो के प्रचार का भी है. निसंदेह सब की रूचि अलग होती है तथा फ़िल्मी समीक्षाए आम जनता की राय बना देती है . जब डॉक्टर्स को, वकीलों को अपने प्रोफेशन के लिए अपने प्रचार की अनुमति नहीं है तो क्या फिल्मो को बेचने के लिए प्रोमोशनल प्रचार पर भी रोक क्यों न हो . जब इतना प्रचार नहीं होता था तब भी लोग फिल्मे देखते थे . अब इसे भी तो भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में रखा जा सकता है . एक दिन में इतने करोड़ में फिल्म गयी-इसमें भी तो जनता का दोहन होता है . क्यों न बाकी सब प्रोफेशंस की तरह फिल्म इंडस्ट्री का भी कोड कंडक्ट हो ....

ए टी एम्-सुविधा भी सिर दर्द भी

कुछ बंकों ने दूसरे बंकों के साथ समझोटा किया होता है कि उनके ग्राहक दूसरे बॅक के ए टी एम से पैसे निकाल सके । एसी व्यवस्था मे दोनों बॅक अपना दायित्व दूसरे पर डालने की कोशिश करते है । परंतु आप जिस बैंक के ग्राहक होते है ,उसी बैंक की ज़िम्मेदारी बनती है ,समझोटा दोनों बंकों का अपनिसुविध तथा व्यवसाए के लिए होता है । ट्रैंज़ैक्शन के डीटेल दूसरे बैंक से लेने मे देर लग सकती है ,इस लिए अपने बैंक के ए टी एम से ट्रैंज़ैक्शन करना प्राथमिकता होनी चाहिए । किन्तु आपका बैंक दायित्व लेने से इंकार नहीं कर सकता क्योकि यह सुविधा आपको अपने बैंक ने ही दी है ।...

home sweet home

कोई घर हो एक – हर व्यक्ति का सपना...

वज़न घटाए,मोटापे से छुटकारा पाये –कितना सच

· यदि सब बातों की जांच के बाद भी आपको लगे कि आपको ट्रीटमंट ठीक नहीं दिया गया ,प्रोमिस के अनुसार वज़न नहीं घटा या आपको उल्टा नुकसान हो गया तो आप उपभोक्ता अदालत मे शिकायत कर सकते है । आपके पास पूरा पता ,विज्ञापन की प्रति,पैसे की रसीद तथा ट्रीटमंट का कोई दस्तावेज़ होने चाहिए।...

चिकित्सा के लिए रोगी की सहमति /स्वीकृति (भाग-111)

ध्यान देने की आवश्यक बाते- · ऑपरेशन के समय रोगी के पास कोई परिजन अवश्य रहे । · ओपराशन से पहले भरे जाने वाले फार्म को ध्यान से पड़े कि आप किस बात के लिए सहमति दे रहे है । · किसी ओषधी से एलेरजी होने या कोई रेगुलर दवा ले रहे हो तो डाक्टर को इलाज से पहले बताए। · ओपराशन की स्थिति मे डाक्टर से एनेस्थीसिया आदि के बारे मे जान ले । आपात स्थिति मे किए गए ओपराशन के बाद डाक्टर के आपात निर्णये तथा नोटिंग की प्रति मांग सकते है।...

जब मेडिकल नेगलिजेंस का संदेह हो तो क्या करे-

एक्सपर्ट ओपिनियन कैसे ली जाए किसी भी स्थान पर मेडिकल नेगलिजेनसे प्रमाणित करने के लिए एक्सपेर्ट ओपिनियन की आवश्यकता होती है । यह ओपिनियन आप स्वयं भी किसी डाक्टर से या किसी सरकारी हॉस्पिटल से ले सकते है। यदि ऐसा संभव न हो सके तो अदालत मे अपना केस दर्ज करके अदालत से ही एक्सपेर्ट ओपिनियन मगाने की प्रार्थना कर सकते है ।अदालत किसी सरकारी हॉस्पिटल को एक्सपेर्ट ओपिनियन के लिए ट्रीटमंट रेकॉर्ड भेज कर मगा सकती है । सरकारी हॉस्पिटल या कभी कभी मेडिकल काउंसिल भी अपनी ओपिनियन देती है ।इसके लिए बीमारी से संबद्ध विभाग मे एक समिति गठित की जाती है तथा डाक्टरों की टीम आपके दस्तावेज़ देख कर अपनी राय देते है...

मेडिकल नेग्लिजेन्स –क्या हो समाधान

किन स्थितियो मे मेडिकल नेगलिजेस नहीं मानी जाती - मेडिकल साइंस मे स्थापित तरीको मे से यदि एक तरीका अपनाने पर भी रोग ठीक न हो सके। रोग की पहचान ठीक की गई ओर इलाज भी ठीक चुना गया हो । सुगर आदि के रोगी को तेज दवा न दी जाने से ठीक होने मे देर लग रही हो । रोग से संबाधी उपस्कर न होने पर या खाली बेड न होने पर या संबद्ध एक्सपर्ट डाक्टर के उपलब्ध न होने पर रोगी को इलाज देने से मना कर दिया जाए।...

ई-कॉमेर्स ओर उपभोक्ता कानून

बीसवी सदी की इस आरंभिक स्टेज पर ही पारम्परिक खरीदारी का युग तो जैसे समाप्त हो गया है। ई कामर्स ने हमारे जीवन की पद्धति को ही बादल दिया है । नेट से खरीदारी ने इतना ज़ोर पकड़ लिया है कि किसी विशिष्ट कानून के अभाव मे भी सब काम चल रहा है ।...

बैंक से ऋण

प्राइवेट बिल्डर से मकान बनवाने के लिए लोन लेने से पहले बिल्डर के जमीन के दस्तावेज़ अवश्य देखे ,कोई कमी होने पर बैंक किशते देना बंद कर सकता है ओर जितनी किशते बैंक ने दे दी उसका भुगतान आपको करना होगा।...

उपभोक्ता अदालत मे कैसे दर्ज होगी आपकी शिकायत

उपभोक्ता अदालत एक सर्व सुलभ ओर सस्ती प्रक्रिया है ,इसलिये इन प्रावधानों के दुरुप्रयोग को रोकने के लिए भी उपाए किए गए है । इस अधिनियम के अनुसार झूठी शिकायत डाल कर अदालत का समये नष्ट करने या किसी को अकारण परेशान करने की मंशा से शिकायत डालने पर शिकायतकर्ता पर दस हज़ार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है ।इन अदालतों के निर्णये का पालन न करने पर भी दोषी व्यक्ति को दस हज़ार रुपये का आर्थिक दंड तथा तीन साल तक की सज़ा दी जा सकती है ओर ये सज़ा भुगतने के बाद भी आदेश का पालन करना बाकी रहता है । आवश्यकता पड़ने पर आदेश का पालन करवाने के लिए संपाती भी जब्त की जा सकती है ।...

नए वाहन मे उत्पादन दोष – क्या हो समाधान

क) प्रारंभ मे ही कोई दोष दिखने लगे तो अलस्य न करे, तुरंत डीलर से संपर्क करे ओर वाहन तब तक स्वीकार न करे जब तक पूरे परीक्षण से यह प्रमाणित न हो जाए कि वाहन चलाने योगय स्थिति मे है । वारंटी कि अवधि मे आपको कुछ खर्च नहीं करना, डीलर का दायित्व होता है कि आपकी गाड़ी वारंटी मे ठीक करके दे । ख) गाड़ी जब भी मरम्मत के लिए जाए ,जॉब कार्ड अवश्य ले ,गाड़ी कि सही स्थिति का यह प्रमाण होता है । ग) प्रारम्भ मे ही दो चार बार मे भी आपको लगे कि दोष दूर नहीं हो रहा तो तुरत उत्पादक को भी लिखे ,गाड़ी बदलने का अनुरोध भी कर सकते है । घ) उपभोक्ता अदालत आपको राहत मे कंपनी को वाहन वापिस ले कर वाहन की राशी वापिस करने के आदेश दे सकती है,मरम्मत के आदेश दे सकती है,आपको हुए कष्ट के लिए मुआवजा दिला सकती है ओर अदालत मे हुए खर्च देने के भी आदेश दे सकती है । यदि आवश्यकता पड़े तो विशेषज्ञ से राय भी मगा सकती है । च) यदि आपका मामला अदालत मे चल रहा है ओर इस बीच आप वाहन बेच देता है तो आप मामला आगे नहीं चला सकते क्योकि आप अब उपभोक्ता नहीं रहते । ----------------------...

वाहन के बेचने के साथ बीमे का ट्रान्सफर नहीं - बीमा कंपनी कितनी जिम्मेदार

पुराना वाहन खरीदने की स्थिति मे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मे अपना नाम तुरत स्थानांतरित करवाना चाहिए अन्यथा वाहन पहले के मालिक के ही नाम माना जाएगा। 2. चूकी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पहले के मालिक के ही नाम माना जाएगा , वही सभी कानूनी दायित्वों को वहन करेगा। किन्तु बेचने के फार्म पर हस्ताक्षर कर के अपना बेचने का काम कर चुकने के कारण ओर पैसे की रसीद जारी कर चुकने के कारण पहले मालिक को भी बीमा आदि के लाभों का हकदार नहीं माना जा सकेगा । 3. रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ट्रान्सफर न होने की स्थिति मे या बीमा स्थानातरित न होने की स्थिती मे खरीददार को बीमा का लाभ नहीं मिलेगा ।...

सिलेंडर से गैस का रिसना -जिम्मेदार कौन

एक आम शिकायत है -गैस पांच ही दिन में ख़तम हो गई। समाधान बताया गया -बिना तोले सिलेंडर न ले. पर यह फार्मूला भी जल्दी फेल हो गया। तोल कर तो लिया था ,वजन पूरा था। खाली हुआ तो पानी भरा निकला ,इसका पता कैसे चले। सुबह सुबह आप बाहर निकलिए -साइकलों पर गैस सिलेंडर लादे गैस एजेंसी के कर्मचारी सप्लाई के लिए निकल पड़े है। पिछली शाम ही आपके वाउचर इशू करा लिए गए थे और गोदाम में गैस पहुचते ही आपका सिलेंडर उतरवा लिया गया,आप भी खुश,समय से पहले गैस मिल गई। गोदाम का दृश्य किसी को दिखाई नहीं देता -वही सुबह सुबह सिलेंडरो के साथ छेड़खानी हो जाती है। गैस निकाल कर पानी भर दिया जाता है इस छेड़खानी में सिलेंडर कि नाब ढीली होती चली जाती है और गैस रिसना एक सामान्य समस्या बन जाती है। आप एजेंसी को शिकायत करें ,पाइप को ख़राब हुआ बता कर के उसे बदल कर चले जायेंगे। गैस का रिसना जस का तस वैसा का वैसा।..........

एजेंट की भूल के लिए कंपनी का दायित्व

सामान्यतः कोई भी व्यक्ति दूसरे की भूल के लिए कभी उत्तरदायी नहीं होता पर कुछ परिस्थितिया ऐसी होती है जब दूसरे की गलती का भुगतान आपको करना पड़ सकता है। इसे प्रिंसिपल की एजेंट के काम के लिए विकेरिओस लायबिलिटी कहते है। ऐसा तब होता है जब आप किसी व्यक्ति को अपनी और से कुछ काम करने का जिम्मा सोंपते है। बीमा कम्पनियो के मामले में प्रायःऐसा देखा गया है कि वे अपना व्यापार बढ़ाने के लिए एजेंट नियुक्त करती है। किन्तु जब कभी एजेंट आम जनता को गलत सूचनाए दे कर क्लाइंट बनाने की कोशिश करता है या ऐसी भूल करता है जिससे बीमित व्यक्ति को नुक्सान पहुचता है या बीमा ही रद्द हो जाता है या फिर बीमे की राशि मिलने में तकनीकी अडचन आ जाती है तो प्रश्न उठता है यहाँ दोष किसका होगा और जिम्मेदारी किसकी होगी..........

रैगिंग एक ज्वलंत समस्या ; शिक्षण संस्थानो का दायित्व

क्या शिक्षण संस्थान सेवा में कमी के लिए दोषी होगा यदि वह रैगिंग रोकने में समर्थ नहीं हो पाता। इस विषय में महत्वपूर्ण बात ये होगी कि क्या संस्थान ने उन दि शा निर्देशों का पालन करने में कोताही बरती है या उन्हें अनदेखा किया है। क्या वांछित समितिया बनाई गई है और वे निर्धारित तरीके से काम कर रही है। यदि कॉलेज किसी भी प्रकार से सरकारी नीतियो का पालन नहीं कर रहा तो निश्चित रूप से सेवा में कमी के दोषी माने जायेगे। पर जहा तक रैगिंग को न रोक पाने का प्रश्न है ,यह एक नितांत असंभावित कृत्य होने के कारण संसथान की पहुँच से बहार की बात है। कठोर से कठोर नियम बनाये जा सकते है ,कठोर से कठोर सजा भी दी जा सकती है किन्तु कौन कब क्या करेगा यह नहीं जाना जा सकता। ...........

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